सुप्रीम कोर्ट ने कहा : शादी के खिलाफ खाप पंचायतों के फरमान गैरकानूनी

Honour Killing

आनर किलिंग के खिलाफ इसे रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिया गया फैसला स्वागत योग्य है. हमारे भारतीय समाज जो अपने आप को सभ्य और संवेंदनशील होने की दुहाई देता है उसी समाज का ये बहुत ही घिनौना रूप भी है जो हमें सिर्फ इस बात पर ये कदम उठाने पर

मजबूर करता है कि लोग क्या कहेंगे. और ये समाज उन मासूमों की जान ले लेता है जिनकी गलती सिर्फ इतनी होती है कि वो अपने पसंद के साथी का चुनाव अपनी मर्जी से करते है, सिर्फ इतनी सी बात पर उनसे जीने का हक़ छीन लिया जाता है. इंसानियत को शर्मसार करने वाली ऐसी घटनाये आये दिन हमारे आसपास होती रहती है.

जिस देश में नारी को देवी मान कर पूजा करने की परंपरा रही हो और उसी देश में एक लड़की को इसलिए मार दिया जाता है कि वो अपने पसंद के लड़के से शादी करना चाहती है. ये समाज का दोगलापन नहीं तो और क्या है. हमें इस सोच को बदलना ही होगा . वैसे भी हमारे देश का पुरुषवर्ग कुछ ज्यादा है मर्दानगी दिखाता है . हमेशा स्त्रियों को दबा कर रखने वाली घटिया सोच किसी स्वार्थी इन्सान की ही हो सकती है. नारी को बराबर का दर्जा तो देना ही होगा और उसे उसका सम्मान भी देना होगा जिसकी वो हक़दार है.

किसी समाज का उत्थान उसके नारियों के प्रति सोच पर निर्भर करता है. स्त्रियों के प्रति आये दिन होने वाले अत्याचार, दुष्कर्म एवं प्रताड़ना की घटनाओ के बारे में सुन कर लगता है हमारा समाज नपुंसक हो गया है. जो अपने बेटों को बेटियों की इज्जत करना तक नहीं सिखा पा रहा है. समाज में आज ये स्थिति इसलिए हुई है क्यूँकि हमारे पेरेंट्स आज इतने लापरवाह हो गए है कि उन्हें पता ही नहीं कि उनके बच्चे किस तरह से बड़े हो रहे, किन लोगों की संगती में है, उनका आचरण-व्यव्हार कैसा है. इसी लापरवाही का नतीजा है जो इस समाज को भोगना पड रहा है.

हमारा समाज ऐसा कभी नहीं था, हमारी सोच इतनी संकुचित कभी नहीं थी. जिस देश में स्त्रियों को स्वयंवर के द्वारा अपने जीवन साथी चुनने का अधिकार रहा हो उस देश में आनर किलिंग की वाली पाशविक सोच सचमुच दुखद और भयावह है.

हमें अपनी इस सोच को बदलना होगा और स्त्रियों को उनका अधिकार एवं सम्मान देना ही होगा जिसकी वो हक़दार है. यही हमारे देश और समाज का भविष्य तय करेगा कि हम अपने बेटियों को कितना आगे बढ़ाते है.

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